जब सुबह आँखे खुली पहली नजर तूझ पे पड़ी
खिडकियों की आंड में इस कदर तू छुप चली
तेरी चंचलता और स्वच्छन्दता की मै कातिल हो गयी
तेरी कोमलता और ब्याप्कता पर दिल को अपने हार गयी
जब और कुछ दूर नजरे बढ़ी आँखों पर छा गयी तेरे लड़ी
तेरी खूबसूरत और गंभीरता में दिल खो गया यही कही
कैसी ये खूबसूरत तेरी ये अदाए है
छल छल छलकता है ह़र पल पनपता है
इन खूबसूरत नजारों में दिल हर पल भटकता है
तेरी ब्याप्कता को तलासने की हर छड कोशिश करता है
कैसी ये समां है कोचीन की इन घटाओ में
पागल बनाती है दिल को बहलाती है
ये नन्ही नन्ही बूंदे मन को सींच जाती है
कैसी ये मनमोहक सुन्दर नजराना है

खिडकियों की आंड में इस कदर तू छुप चली
तू उधर खड़ी मै इधर खड़ी कैसी घडी ये आ पड़ी
इन खूबसूरत बादियो में दिल यू ही उमड़ पड़ी
तेरी चंचलता और स्वच्छन्दता की मै कातिल हो गयी
तेरी कोमलता और ब्याप्कता पर दिल को अपने हार गयी
जब और कुछ दूर नजरे बढ़ी आँखों पर छा गयी तेरे लड़ी
तेरी खूबसूरत और गंभीरता में दिल खो गया यही कही
कैसी ये खूबसूरत तेरी ये अदाए है
छल छल छलकता है ह़र पल पनपता है
इन खूबसूरत नजारों में दिल हर पल भटकता है
तेरी ब्याप्कता को तलासने की हर छड कोशिश करता है
कैसी ये समां है कोचीन की इन घटाओ में
पागल बनाती है दिल को बहलाती है
ये नन्ही नन्ही बूंदे मन को सींच जाती है
कैसी ये मनमोहक सुन्दर नजराना है
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