Wednesday, July 27, 2011

LOVE THE MANSOON HERE

जब सुबह आँखे खुली पहली नजर तूझ पे पड़ी
खिडकियों की आंड में इस कदर तू छुप चली
तू उधर खड़ी मै इधर  खड़ी कैसी  घडी ये आ पड़ी
इन खूबसूरत बादियो में दिल यू ही उमड़ पड़ी

तेरी चंचलता और स्वच्छन्दता की मै कातिल हो गयी
तेरी कोमलता और ब्याप्कता पर दिल को अपने हार गयी
जब और कुछ  दूर नजरे बढ़ी  आँखों पर छा गयी तेरे लड़ी 
तेरी खूबसूरत और गंभीरता में दिल खो गया यही कही

 कैसी ये खूबसूरत तेरी ये अदाए है
छल छल छलकता है ह़र पल पनपता है
इन खूबसूरत नजारों में दिल हर पल भटकता है
तेरी ब्याप्कता को तलासने की हर छड कोशिश करता है

कैसी ये समां है कोचीन की इन घटाओ  में
पागल बनाती है दिल को बहलाती है
ये नन्ही नन्ही बूंदे मन को सींच जाती है
कैसी ये मनमोहक सुन्दर नजराना है


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