कल्पनाओ के भंवर में इस कदर खो गये हम
अपनी हर कल्पना को हकीकत समझ बैठे हम
उसी कल्पनाओ पे आधारित है ये छोटी सी दास्ताँ
ना ये मेरी दास्ताँ है ना मेरे कल्पनाओ की
ये तो दास्ताँ है उस कल्पना की जो अब कल्पना बन गयी
छोटे क़स्बे से निकलकर अपनी दृढ़ संकल्पों पे चलकर
चल पड़ी कल्पना अपनी उड़ान की सफ़र पर
अपनी मेहनत के बल पर और विश्वास के उम्मीद पर
चल पड़ी अन्तरिक्ष में अपने सपने को साकार करने
कितना कुछ किया बहुत कुछ दिया देश को
अपनी मेहनत और लगन से एक जगह बना लिया देश में
पर किस्मत की मारी बेचारी को ये ना पता था
अन्तरिक्ष की ये उड़ान उसकी आखिरी उड़ान थी
खो गयी इस कदर अन्तरिक्ष में कहीं पे
बस गयी लोगो के दिलो में एक मिशाल बन के
जी हाँ ये वही कल्पना चावला है जो अब कल्पना बन गयी
लोगो के दिलो में कल्पना की एक छाप छोड़ गयी
लोग कहते है लड़कियों को बाँधकर रखो
मैं तो कहता हूँ उन्हें तुम खुला छोड़ दो
क्या पता कोई उसमे से कल्पना बन पड़ें
अपनी सपनो के उड़ान के ओ चल पड़े
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