Wednesday, July 27, 2011

बारिस की नन्ही बूंदे

छम छम छम मेघ ये बरसे
तुमसे मिलने को नयन ये तरसे
कैसी ये निराली घटा छाई है
दिल मेरा धक् धक् अब यू ही बोले
कैसे ये सुहाने दिन आये है
बादल गरजे बिजली तडके

आंसमा में पंछी यू ही उमड़े
कैसी ये निराली घटा छाई हैं
दिल मेरा धक् धक् यू ही बोले
कैसे ये सुहाने दिन आये हैं

कूँ कूँ करती कोयल बोले
सुहानी घटा दिल को छू के बोले
उठ जा निद्रा से "अरविन्द " होले होले
देखो बाहर कैसी घटा छाई है
कैसे ये सुहाने दिन आये हैं







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