Tuesday, February 5, 2013

जिन्दगी की समां

जिन्दगी की समां  को कभी बुझने ना  दो
अपनी अरमा को कभी मिटने ना दो
चाहे मुश्किल बढें  या  हो जुल्मो -सितम
लहरों की तरह आगें तुम बढते  रहो !

हो खुद पे अगर यकीन तो हौसला रखो
इस  सितम ये ज़माने की परवाह ना करो
आशा के किरण की ज्योति की प्रज्ज्वलित किये
संघर्घ के मार्ग पे आगें बढते  रहो !

जिंदगी ये हमारी बड़ी अनमोल है
किसी की खातिर इसे कभी रुकने न दो
अगर बदलना है तो अपने विचारो को बदलो
आज के सकारात्मकता का कफ़न बांध लो !

है किसका इंतजार   बेखबर  इतना क्यू  हों
आंगे की चुनौती से भयभीत तुम क्यू  हों
अँधेरा कितना भी घना हों फिर भी मगर
प्रज्वलित  दीप के आंगें कभी ठहरता नहीं !

 जिन्दगी की अहमियत को समझो अभी
इसे अब कभी तुम फिर रुकने ना दो
कर लो दृढ़ संकल्प तुम अभी के अभी
ना हटोगे तुम पींछे मुड़कर कभी !




 

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