Wednesday, February 22, 2012

आगोश भी है , आक्रोश भी है
थपेड़े सहने का मुझमे समावेश भी है
कहर का दरिया भी है,चमकता सूरज भी है
पनपती इन लपटों को झेलने का साहस  भी है
उमड़ती इस कौतूहल का आहट भी है

अभिलाषा भी है, जिज्ञासा भी है
हर मोड़ पे कभी कभी निराशा भी है
बेचैनी भी है , ज्वलनशीलता भी है
दुनिया की कितनी गजब परिभाषा भी है

मादकता भी है सहजता भी है
सफलता के एक किरण की आशा भी है
हलचल भी है, झुनझुनाहट भी है
दिल में उमड़ती कमल के हिचकोले भी है

बचपना भी है , यौवंकता  भी है
जिंदगी के अनेक रूप की गाथा भी है
मिलना भी है ,बिछड़ना भी है
नए रिश्तो से जुड़ने की जयगाथा भी है

भावार्थ बदलते है लोग फिर भी सवरते है
जिंदगी के व्याकरण की गजब परिभाषा भी है
हर पल को जी लेने की एक आशा भी है

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