दिल है प्यार मुहब्बत का
दिलो से दिल मिलाने का
पर दिलो की इन चाहतो में
आँखों की शूरमा को क्यों बिखलाते हो!
जला के रख कर देती है
ये नफरते ज़माने को
भूत, भविष्य के लम्हे में
दिल को क्यू जलाते हो
समझ में ये नहीं आता
कि क्यूँ इतना नाज है इसपे
दिलो से दिल मिलाने को
इतना बेताब क्यू है ये!
आखिर राज क्या है इसका
जो ज़माने को पागल बनाती है
इन मडराती कुमुदिनी पे
अपनी गुनगुनाहट को क्यू बिखलाती है
दिलो से दिल मिलाने का
पर दिलो की इन चाहतो में
आँखों की शूरमा को क्यों बिखलाते हो!
जला के रख कर देती है
ये नफरते ज़माने को
भूत, भविष्य के लम्हे में
दिल को क्यू जलाते हो
समझ में ये नहीं आता
कि क्यूँ इतना नाज है इसपे
दिलो से दिल मिलाने को
इतना बेताब क्यू है ये!
आखिर राज क्या है इसका
जो ज़माने को पागल बनाती है
इन मडराती कुमुदिनी पे
अपनी गुनगुनाहट को क्यू बिखलाती है
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